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ऑनलाइन शिक्षा के नुकसान

ऑनलाइन शिक्षा के नुकसान (online education ke nuksan)

दोस्तों जैसे कि हमने पिछले पोस्ट में ऑनलाइन शिक्षा के फ़ायदों के विषय में चर्चा की थी, और जाना थी कि किस प्रकार यह नीति हमारे लिए लाभकारी सिद्ध हो रही है। आज हम ऑनलाइन शिक्षा के विभिन्न ऐसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे जो विद्यार्थियों के लिए हानिकारक हो सकती हैं।

जब से इंटरनेट सस्ता हुआ तभी से ऑनलाइन प्रोडक्ट व सर्विसिस की पहुँच साधारण आदमी तक बहुत ज्यादा बढ़ी है।

इसका श्रेय एक हद तक रिलायंस इंडस्ट्री अथवा जियो कम्पनी को जाता हैं, क्योंकि जियो कम्पनी ने फ्री 4 जी डाटा देकर भारत देश में इंटरनेट क्रांति ला दी। इसके बाद से ही इंटरनेट भारत में सस्ता हो चला। साथ ही ऑनलाइन तकनीकी का एकदम से विस्तार हुआ। छोटे बच्चे से लेकर बडे़ बुजुर्ग तक इंटरनेट से जुड़ाव खूब पसंद आया। 

देखते ही देखते ऑनलाइन सर्विसेज ने अधिकाधिक लोगो को पेपरलैस कर दिया। साथ ही बहुत सारे लोगो को रोज़गार भी प्रदान किया है। यूटयूब के माध्यम से आज अनेको भारतीय विभिन्न प्रकार कंटेट देकर अपना रोज़गार चला रहे हैं। इनमें एक बहुत बड़ी तादाद ऑनलाइन टयुटर की हैं जो ऑनलाइन शिक्षा उपलब्ध करा रहें हैं। 

इसके अलावा लगभग सभी बड़े कोचिंग सेंटर भी अब ऑनलाइन कोचिंग देते हैं। 

अगर ध्यान से देखे तो ऑनलाइन एजुकेशन क्या है और इसके फायदे ज्यादा व नुकसान कम नजर आयेगे। लेकिन ये नुकसान बहुत गंभीर हो सकते हैं। क्योंकि इनका सीधा असर हमारे बच्चों पर ही पड रहा हैं।

इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इसमें पारंपरिक कक्षा के जैसा माहौल नही बन पाता हैं। आप सभी इस अनुभव को भलीभाँति समझते होगें कि कक्षा में विद्यार्थियों के साथ बैठकर पढ़ने के फायदे बहुत ज्यादा हैं। अध्यापक के सामने विद्यार्थी सजग रहता हैं।

उसका ध्यान इधर-उधर भटकने पर शिक्षक उसे तुरंत ड़ांट देते हैं। या फिर दूसरे विद्यार्थी शिकायत कर देते हैं। ऐसा करने से परस्पर कक्षा में सजगता, सांमजस्य व उर्जा का माहौल बना रहता हैं। इसके अलावा शिक्षक किसी भी विद्यार्थी से अचानक टॉपिक के बारे में प्रश्न पूछ लेता है। ऐसा लगभग सभी विद्यार्थियों के साथ होता है। आप के साथ भी हुआ होगा। पारंपरिक कक्षाओं में अध्यापक अपने विद्यार्थियों का रोज़ाना का होम-वर्क भी चेक कर लेते हैं, जिस कारण लगभग सभी बच्चों अपना होम-वर्क पूरा रखते हैं।

लेकिन ऑनलाइन कक्षाओं में ऐसा ना के बराबर ही देखने को मिलता हैं। पारंपरिक शिक्षा में अलग-बगल के विद्यार्थी आपस में पूछँकर समस्या का समाधान कर लेते हैं। नोट्स एक्सचेंज कर लेते हैं। या फिर अगर किसी विद्यार्थी को टीचर द्वारा कुछ समझ नहीं आया तो दूसरे विद्यार्थियों से पूछकर समाधान कर लेते हैं। ऑनलाइन शिक्षा में ऐसा होता तो हैं परंतु वहाँ पर कमेंट सेक्शन में कमेंटस की जवाब देही बहुत तेज होती हैं जिस कारण बहुत कुछ छूट जाता हैं या समझ नहीं आता है।

क्या ऑनलाइन एजुकेशन में इंटरनेट स्पीड समस्या है

हाँ, बिल्कुल अगर इंटरनेट की स्पीड अच्छी नहीं हैं तो लाइव क्लासेस में आप ठीक तरह से कनेक्ट नहीं हो पायेंगे।

पूअर इंटरनेट स्पीड आपका पूरा लेक्चर खराब कर सकती है। और एक लेक्चर खराब होने का मतलब हैं बहुत हानि, स्पेशली गणित जैसे विषय के लिए। दूर गाँवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कुछ खास नहीं होती, कारण मोबाइल टॉवर की कमी होने से, ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा विद्यार्थियों को नुकसान पहुँचा सकती है। इसके अलावा मोबाइल, कम्प्यूटर की गुणवत्ता  भी अंतर पैदा करती हैं। बेकार व घटिया प्रोसेसजिंग वाले मोबाइल व कम्पयूटर वीडियो क्वालिटी व विडियों हैंग जैसी समस्या पैदा कर सकते हैं। जबकि पारमपिरक कक्षाओं में ऐसी हानि की संभावना नहीं होती।

क्या पारंपरिक कक्षा का माहौल ज्याद बेहतर होता है

इसमें कोई दो रॉय नहीं है कि पारंपरिक कक्षा में अध्ययन को ज्यादा प्राथमिकता दी जाये। शिक्षा उसके स्थान पर ही ज्यादा अनुकूल होती है। पारंपरिक क्लासरूम का माहौल बहुत हद तक मानसिक रूप से पढने के तैयार करता हैं। घर में बैठकर ऑनलाइन क्लास लेने के मुकाबले, कक्षा में जाकर सभी विद्यार्थियों के साथ बैठकर पढ़ना ही ज्यादा बेहतर होता है। घर में हम अपने हिसाब से उठते बैठते व लेट कर भी पढ़ लेते हैं, कहने का अर्थ हैं कि अपनी सुविधानुसार ही सब कुछ करते हैं। जबकि पारंपरिक कक्षाओं में हमें हमारे अध्यापक की व्यवस्थानुसार पढना होता है। वहाँ पर शिक्षक का भी थोड़ा भय रहता है, जिस कारण बच्चे आलस छोड सजग रहते हैं। हाँलाकि, कुछ अपवाद विद्यार्थी हर कक्षा में होते है जो नहीं पढ़ते और टाइम पास करते हैं। 

बच्चों पर इंटरनेट के हानिकारक प्रभावों

ऑनलाइन शिक्षा का एक बड़ा नुकसान यह हैं कि बच्चे पढ़ने के बजाय, मोबाइल गेम, फिल्म, सोशल मीडिया, यूटयूब, चैटिंग आदि गतिविधियाँ अधिक करते हैं। बच्चों का मन जल्दी ही भटक जाता हैं ऐसे में इंटरनेट कई तरह से हानिकारक भी सिद्ध हो रहा है। शिक्षा के बहाने मनोरंजन में अपना समय खराब करना ऑनलाइन शिक्षा के नुकसान से ही जुड़ा हैं। सोशल मीड़िया व यूटयूब पर बहुत ज्यादा युवा एक्टिव रहता है। हांलाकि, सोशल मीडिया पर एजुकेशन डाटा उपलब्ध है। लेकिन ये सभी सोशल साईट्स कही ना कही ध्यान भटका ही देती है। जिसका असर बच्चों की शिक्षा व व्यवहार पर पड़ता है। 

ऐसे में माँ-बाप व घर के बड़ों की यह जिम्मेदार है कि वह ऐसी नकारात्मक व हानिकार गतिविधियों से अपने बच्चो को दूर रखे। उन पर ध्यान रखे कि कही उनके बच्चे ऑानलाइन शिक्षा के बहाने पढाई में ध्यान न देकर, दूसरी गतिविधियों में लिप्त तो नहीं। इंटरने एक संवेदनशील सुविधा है, हमारा लक्ष्य हमारे बच्चो को यह सीखाना है कि कैसे इंटरनेट का सदुपयोग किया जाये और कैसे इसकी लत अथवा नुकसान से बचा जाये।

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One Comment on blog kaise banaye

    sam
    October 7, 2020

    Nice posts



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