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Nari Sashaktikaran Kya Hai : नारी सशक्तिकरण क्या है

Nari Sashaktikaran Kya Hai

नारी सशक्तिकरण आज के समय का सबसे प्रसिद्ध विषयों में से एक हैं। आज दुनिया के हर कोने में लोग नारी सशक्तिकरण की बाते कर रहे हैं। विकसित एवं विकासशील देशों में महिलाओं के अधिकारों के लिए हर वर्ग से आवाज उठाई जा रहीं। हैं। ऐसे में हमें यह अच्छे से समझना होगा की यह महिला सशक्तिकरण क्या हैं।

महिला सशक्तिकरण अथवा नारी सशक्तिकरण एक ऐसा विचार है जिसके अंतर्गत समाज में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा, अच्छा जीवन शैली, शुद्ध, पर्याप्त व पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार, उच्च शिक्षा, वोट का अधिकार, सरकारी नौकरियों में भागीदारी, स्वतंत्रता से बोलने का अधिकार, देश की सुरक्षा एवं आर्थिक व्यवस्था में योगदान, मनपसंद पहनावा, पुरुषों के बराबर दर्जा आदि स्तरों पर नारी को सशक्त एवं उत्तम बना देना। ये सशक्तिकरण के मुख्य बिंदु हैं।

दूसरे शब्दो कहे तो नारी सशक्तिकरण का अर्थ है नारी को आर्थिक, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार, खेल कूद, मानसिक, शारीरिक, ज्ञान, सामाजिक, तकनीकी, यान्त्रिकी, राजनीती, अन्तराष्ट्रीय आदि सभी प्रकार के क्रिया कलापो में स्वत्रंतापूर्व योगदान होना व देश समाज में महिला पुरूष बराबरी होना।

Mahila Sashaktikaran Ki Avashyakta(महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता)

महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता इसलिए जरूरी है, क्योंकि संसार के विभिन्न समाज में स्त्रियों की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, पारिवारिक, स्वास्थ्य सम्बन्धी, व्यवसाय, आदि गतिविधियों में पर्याप्त योगदान से एक लंबे समय तक वंचित  व शोषित रखा गया। स्त्रियों को केवल घर का कार्य करने तक ही सीमित कर दिया गया। समाज पुरुष प्रधानता की ओर बढ़ता गया। महिलाएं ज्ञान विज्ञान व कला आदि के प्रत्येक क्षेत्र में पिछड़ती चली गई। बाल विवाह प्रारम्भ हो गया। बालिकाओं को स्कूल व कॉलेज जाने से रोका गया। नारियों को उन सभी प्रकार शिक्षा प्रणाली से वंचित किया गया जिससे वे पुरुषों के बराबर स्थान प्राप्त कर सकती थी। 

ऐसे में समाज व दुनिया के कुछ व्यक्तियों ने महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करना शुरू किया, आंदोलन किये, जेल गये, अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपने विचार व आवाज पहुँचायी। एक लंबे अंतराल व आन्दोलन के पश्चात महिलाओं को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके अधिकार मिलने प्राप्त होने लगे। वर्तमान में महिलाओं की स्थिति आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, क्रीडा आदि के क्षेत्र में परिपक्व हुई है।

Bharat Me Mahila Sashaktikaran (भारत में महिला सशक्तिकरण)

प्राचीन काल से भारत में स्त्रियों को पुरुषों के स्तर का स्थान प्राप्त है। भारत देश में स्त्रियों की पूजा की जाती हैं। भारत विश्व में एकमात्र ऐसा देश हैं जहां कन्याओं, स्त्रियों की पूजा की जाती हैं। यहाँ महिलाओं को देवी की संज्ञा दी जाती हैं। पुराने समय में भारतवर्ष की स्त्रियों को स्वयंवर के माध्यम से अपनी पसंद का वर चुनने का अधिकार था। कन्याओं को गुरुकुल में शास्त्र, शस्त्र की विद्या दी जाती थी। अगर कोई बालिका अपनी पसंद की  विद्या ग्रहण करना चाहे तो कर सकती थी। ऐसा इसलिए किया जाता था ताकि महिलाएं भी पुरुषों की तरह आत्मनिर्भर हो सके एवं विवाह के पश्चात उत्पन्न संतानों को माँ द्वारा अच्छी शिक्षा प्रदान की जा सके। इससे बच्चो का चरित्र निर्माण हो सके। चूंकि माता ही प्रथम गुरु होती हैं। इसलिए भारतीय अथवा सनातन संस्कृति में माँ का शिक्षित होना अनिवार्य था। 

परंतु समय बीतने के साथ कुछ भारत देश षड्यंत्रकारी ने अपने स्वार्थ के लिए लोगो को गलत तरीके से मिलावटी शिक्षा प्रस्तुत की  ताकि उन व्यक्तियों का समाज पर प्रभुत्व बना रहे। साथ ही विदेशी आक्रमण कर्ताओ द्वारा भारतीय शिक्षा व्यवस्था को नष्ट किया गया। अंग्रेजों द्वारा अंग्रेजी शिक्षा पद्धति भारतीयों पर थोपी गई।

लेकिन इतना सब होने के पश्चात भारत देश में आज भी स्त्रियों का सम्मान पहले के जैसा ही हैं। हालांकि पिछले कुछ वर्षों तक शिक्षा एवं अन्य सामाजिक अधिकारों से महिलाओं को वंचित रखा गया। एक समय तक तो कन्या भ्रूण हत्या प्रचलन में रहा हैं। लेकिन आज ऐसी कुरीतियों में गिरावट आयी है। देश में सरकार द्वारा बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी उच्च विचारधारा वाली योजनाएं चलायी जा रही हैं। महिलाएं देश विदेश के सभी प्रमुख स्तर जैसे सुरक्षा, आर्थिक, स्वास्थ्य, राजनीति, अंतरराष्ट्रीय मुद्दे, न्यायपालिका आदि सभी क्षेत्रों में अच्छे प्रकार से कार्य कर रहीं हैं।

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Mahila Sashaktikaran Ke Upay (महिला सशक्तिकरण के उपाय)

महिला सशक्तिकरण के उपाय इस प्रकार हैं।

  • अच्छी व उच्च शिक्षा का प्रावधान।
  • पर्याप्त व उच्च कोटि की स्वास्थ्य सेवाएं व उनमें भागीदारी।
  • समाज में नारी के सम्मान व स्वाभीमान की भावना का दृष्टिकोण।
  • दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या  व बालिका विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध व सजा।
  • न्यायपालिका, सरकार व नौकरशारी में निम्न व उच्च पदों पर हिस्सेदारी एवं बढ़ावा।
  • माता पिता की संपत्ति में लड़कियों को भी हिस्सेदारी।
  • इंटरनेशनल स्तर पर पॉलिटिकल, सोशियल, सुरक्षा, पत्रकारिता आदि विषयों में हिस्सेदारी।
  • पुलिस विभाग, जल थल वायु सेना आदि देश की सेनाओं में नौकरी करना।
  • ग्राम, जिला, नगर, राज्य व देश स्तर पर विभिन्न प्रकार के चुनावी प्रतियोगिता में भाग लेना व नेतृत्व करना।
  • हमेशा महिलाओं की समस्याओं को समाज, सरकार व न्यायपालिका के सामने उचित समाधान के लिए रखना।
  • सिविल सर्विस के पदों पर चयनित हो कर लोगो की सेवा करना।
  • शारीरिक व मानसिक विकास एवं वृद्धि के लिए उचित पौष्टिक आहार प्राप्त करना।

इसके अलावा भी बहुत सारे कार्य व क्षेत्र है जहाँ महिला सशक्तिकरण किया जा सकता है, अथवा उसमें सुधार लाया जा सकता हैं।

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Mahila Sashaktikaran Mein Shiksha Ki Bhumika (महिला सशक्तिकरण में शिक्षा की भूमिका )

Mahila Sashaktikaran Mein Shiksha Ki Bhumika उतनी ही महत्वपूर्ण हैं जितना भोजन व चिकित्सा व्यावस्था। क्योंकि अच्छा भोजन करने से शरीर व मस्तिष्क का विकास होता है। जिससे अच्छा स्वास्थ्य प्रदान होता है। उसी प्रकार प्रयाप्त व उच्च स्तर की शिक्षा बालिकाओं को प्राप्त होने पर उनके सोचने विचारने की शक्ति में सुधार व ज्ञान की वृद्धि होती हैं। 

संक्षेप में कहे तो महिलाओं को अच्छी शिक्षा प्रदान करने से महिलाओं का मानसिक विकास, ज्ञान में वृद्धि, बौद्धिक स्तर में वृद्धि, समस्या का समाधान करने की क्षमता में सुधार, सोचने विचारने की शक्ति में बढोतरी, निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि, सभी कार्यों को सही ढंग से करने की योग्यता में कुशलता, व्यवहारिक ज्ञान में बढ़ोतरी, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मनिर्भरता, सही गलत की परख होना, सुरक्षा के प्रति उजागरता, विवेक में वृद्धि होना, अच्छी गृहिणी, स्वयं के बच्चों को शिक्षित करना, रोजगार के अवसर मिलने की सम्भावना बढ़ जाना, डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, नेता बनकर समाज की सेवा करना। आदि विभीन्न प्रकार से शिक्षा महिलाओ को लाभ पहुँचाती हैं। एवं एक समृद्ध समाज व देश का निर्माण करने में सहायक होती हैं।

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