Spiritual

Kya Bhagwan Hote Hai क्या भगवान है या नहीं | Is God Exist in Hindi

अकसर लोगों के मध्य भगवान के अस्तित्व को लेकर विभिन्न प्रकार की भ्रांतियां मौजूद रहती है। इसलिए हमने इस लेख में यह बताया है कि भगवान होते है कि नहीं। बहुत बड़े स्तर पर लोगों का प्रश्न है कि क्या इस दुनिया में वास्तव में कोई भगवान है कि नहीं, इसका उत्तर है हाँ।

भगवान अवश्य होते है

भगवान अवश्य होते है। अगर कोई व्यक्ति अपने विवेक का प्रयोग कर संसार के प्राकृतिक ढांचे व्यवस्था को समझे तो वह पाएगा कि, यह संसार इतने सुचारू व व्यवस्थित तरीके से बना हुआ है जैसे किसी ने इसकी रचना की हो। ग्रहों की गति, आकाश, पेड़ पौधे, जल, अग्नि, वायु सब कुछ इतना सटीक है कि कोई कमी दिखाई नहीं देती। ऐसा केवल एक बुद्धिमान ज्ञानी है कर सकता है. जिसे वेदों में भगवान कहा गया है। शास्त्र कहता है एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति. भगवान एक है परंतु सभी विद्वान व्यक्ति उसे भिन्न नामों से बुलाते है।

इस संसार में जो कुछ होता है उसके पीछे एक कारण होता है। ब्रह्मांड में प्रत्येक वस्तु एवं पदार्थ निर्माण का एक स्रोत है; समस्त प्राकृतिक संसाधन एवं गतिविधियां जिस शक्ति द्वारा चलायी जाती है, उसे ही भगवान कहा गया है। समस्त जगत में कुछ भी ऐसा नहीं है जो स्वयं घटित होता है, प्रत्येक कार्य के पीछे एक ऊर्जा काम करती है, जो आंखो से देखी नहीं जा सकती है. वह ऊर्जा भगवान के भीतर से निकलती है। सूर्य, चंद्रमा, तारे, वायुमंडल एवं नक्षत्रों आदि में जो ऊर्जा वह सब भगवान के द्वारा ही संचालित व नियंत्रित की जाती है। इसलिए सभी प्राकृतिक गतिविधियों का एक मात्र कारण वह सर्वव्यापी भगवान ही है।  

मुंडकोपनिषद के अनुसार भगवान

मुंडकोपनिषद कहता है: यथोर्णनाभिः सृजते गृह्णते, तथाऽक्षरात्‌ संभवतीह विश्वम्‌ ॥ अर्थात जिस प्रकार मकड़ी(Spider) जाले को अपने भीतर से उत्पन्न करती है, एवं उसे पुनः अपने भीतर ही सिकोड़ लेती है; उसी प्रकार वह अविनाशी पुरूष भगवान सारे संसार को अपने भीतर से पैदा करता है. और प्रलय काल में स्वयं के अन्दर ही धारण कर लेता है। यह संपूर्ण संसार भगवान में समाया है। जिस प्रकार आकाश(Space) किसी पदार्थ के बाहर एवं भीतर दोनो में स्थित होता है, उसी प्रकार वह सर्वव्यापी भगवान अनंत होने के कारण सभी वस्तुओं के भीतर भी है, और बाहर भी।

भगवान होने का  प्रमाण है

  • भगवान होते है इसलिए पृथ्वी व अन्य ग्रहों पर जन्म मृत्यु का जीवन चक्र चलता रहता है. भगवान ने सभी जीवों के लिए भोजन पैदा करा ताकि कोई भूखा न रहे, और सब को पर्याप्त ऊर्जा मिलती रहे।
  • भगवान होने का अन्य प्रमाण यह है कि उसने सूर्य का निर्माण किया ताकि संसार में दिन व रात की घटना होती रहे एवं वर्ष में ठंडी, गर्मी, बरसात व वसंत मौसम बदलते रहे है। सूर्य का प्रकाश इतना गर्म है कि उसके सामने कोई भी वस्तु नष्ट हो जाती है. मनुष्य को इस गर्म ताप से बचाने के लिए भगवान ने पृथ्वी व सूर्य के बीच की दूरी बढ़ा दी ताकि लोगों को उतना ही प्रकाश मिल सके जितना आवश्यक है। यदि भगवान सूर्य को नहीं बनाता तो सृष्टि का कोई भी कार्य पूर्ण न हो पाता एवं जगत में जीवन की कल्पना करना असंभव हो जाता है।
  • भगवान होते है इसका एक उदाहरण यह है कि भगवान ने मनुष्यों के उपचार के लिए विभिन्न प्रकार की प्राकृतिक औषिधिया बनायीं जिनसे मनुष्य सभी प्रकार के रोगों का उपचार कर सकता है। 
  • भगवान होने का अन्य प्रमाण यह है कि अंतरिक्ष में मौजूद ग्रह व पिंड एक दूसरे से नहीं टकराते है. भगवान ने उन्हे इस प्रकार से बनाया है कि वे एक दूसरे के रास्ते में आये बिना निरंतर रूप से अपना कार्य करते रहते है। 
  • भगवान होने का प्रमाण यह है कि जब कोई जीव मर जाता है तो मनुष्य द्वारा उसको पुनः जीवित नहीं किया जा सकता है. भगवान ने नियम बना रखा है कि जो कोई जन्म लेता है वो अवश्य मरता है। यह नियम सदैव सत्य की कसौटी पर खरा उतरता है।
  • भगवान होते है इसका एक उदाहरण समुद्र की लहरों का अपनी मर्यादा के भीरत रहना है, समुद्र अपनी सीमा नहीं लांघता अगर भगवान ने समुद्र जल की सीमा न निर्धारित कि होती तो समस्त धरातल पानी में डूब गया होता जिससे पृथ्वी पर जीवन समाप्त हो जाता।
  • भगवान होते है इसका एक प्रमाण यह है कि जब कोई व्यक्ति संकट में होता है और उसे सहायता की कोई किरण नहीं दिखाई देती  है तो वह केवल भगवान को ही याद करता है, और बोलता है कि भगवान एक बार बचा ले।
  • भगवान होते है इसका एक प्रमाण यह है कि संसार में मनुष्य के अलावा अन्य जीव पशु पक्षी, जानवर, कीट पतंग, कीड़े मकोड़े आदि है. ये सभी प्रकृति की व्यवस्था को बनाए रखने में अपने स्तर पर निरंतर कार्य करते रहते है। जो गंदी वायु मनुष्य श्वास के द्वारा वायुमंडल में छोडते है उसे पौधे अपना भोजन बनाते है, पौधों से मनुष्यों एवं शाकाहारी जीव जंतुओं को खाद्य पदार्थ प्राप्त होते। भगवान ने मृत जानवरों के शरीर को नष्ट करने के लिए चीटियां, कीड़े, लकड़बग्घे, गिद्ध बनाये है इन्हे संसार का सफाई कर्मचारी भी कहते है। अगर भगवान इस प्रकार की व्यवस्था न करता तो सब कुछ उथल पुथल होकर नष्ट हो जाता। इससे सिद्ध होता है कि भगवान होते है।

भगवान होने का प्रमाण यह कि उसके द्वारा किये गए किसी भी कार्य में कोई त्रुटि नहीं है

भगवान होते है इस बात का प्रमाण यह है कि जो कुछ भी इस जगत में प्राकृतिक रूप से मौजूद है, वह सब अपने गुणों के अनुरूप व्यवहार करते है। प्रकृति का कोई एक नियम दूसरे नियम के विपरीत कार्य नहीं करता है। इस अनंत ब्रह्मांड में सब कुछ इतना संतुलित है कि, बिना किसी दैवीय शक्ति के इसे व्यवस्थित नहीं किया जा सकता है। सृष्टि को चलाना मनुष्य के बस की बात नहीं है. और अपने आप कुछ नहीं घटित हो सकता है किसी काम को करने के लिए कारण आवश्यक है। भगवान द्वारा सृष्टि निर्माण करने का कारण सभी जीवों को संसार का सुख-दुख भोग प्रदान करना है।

भगवान होते है इसलिए सौर मंडल एवं सभी ग्रह विज्ञान के नियमों का सदैव पालन करते है। भगवान ने जगत बनाते समय इस प्रकार से सभी चीजों की व्यवस्था की है कि कोई भी वस्तु अपने गुणों के विपरीत कार्य नहीं करती है, और न ही कोई नियम दूसरे नियमों को काटता है। संसार में सब कुछ एक समान चलता रहता है, रात दिन, ऋतुएं, गुरुत्वाकर्षण, घर्षण बल, भार, सभी कुछ इतने सटीक तरह से कार्य करते है कि इनमें कोई त्रुटि नहीं आती है। इस बात से पता चलता है कि यह सब किसी शक्तिशाली चेतन द्वारा रचा गया है जिसे भगवान कहते है। अगर ये सब किसी मनुष्य ने बनाया होता तो इसमें अवश्य ही कोई न कोई खोट आ ही जाता है। क्योंकि मनुष्य द्वारा किया गया कोई भी कार्य शत प्रतिशत परफेक्ट नहीं होता है. यह अधिकार केवल भगवान को है; इसलिए उसे सर्वगुण संपन्न कहते है।

विज्ञान के अनुसार भगवान क्या है

भारतीय सनातन विज्ञान में भगवान की सत्ता को स्वीकार किया गया है, प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक ग्रन्थ वेदों में भगवान को समस्त ब्रह्माण का स्वामी माना गया है, इनके अनुसार भगवान ने  विश्व, अंतरिक्ष, ग्रहों, उपग्रहों, तारो, एवं समस्त वस्तुओं को बनाया है। वैदिक विज्ञान कहता है भगवान ही सब कुछ बनाता और नष्ट करता है। आध्यात्मिक विज्ञान ने भगवान के गुणों, एवं कार्यों की व्याख्या की गई है। वेद बड़े ही तार्किक शास्त्र जो भगवान क्या है, उसने संसार को क्यों बनाया है इन सभी प्रश्नों का संतुष्टि जनक उत्तर देते है। उपनिषद में ऋषियों(scientists) ने भगवान को निराकार, सर्वज्ञाता, अवर्णम, अजन्मा एवं सर्वगुण संपन्न बताया है।

परंतु, पश्चिम सभ्यता वाला विज्ञान भगवान को नहीं मानता, प्रसिद्ध खगोलीय वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग ने भगवान(God) के अस्तित्व को मानने से इनकार कर दिया था। उन्होने बताया था कि ब्रह्माण में कोई गोड नहीं होता है, यह सृष्टि अपने आप चलती है। 

यह भी पढ़े-  भगवान(ईश्वर) क्या है वह कैसा है                   

परम सत्य क्या है

You may also like