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Gayatri Mantra Ka Arth गायत्री मंत्र का अर्थ हिन्दी में

Gayatri Mantra Ka Arth hindi

“ओ३म् भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रयोदयात्।।”

गायत्री मंत्र बुद्धि को बढ़ाने वाला मंत्र है

गायत्री मंत्र बुद्धि को बढ़ाने वाला मंत्र है. इसका वर्णन ऋग्वेद व अन्य वेदों में भी मिलता है। गायत्री मंत्र का देवता सविता है। यह मंत्र सभी वैदिक मन्त्रो में श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि इसमें ईश्वर से मनुष्यों की बुद्धि वृद्धि करने की कामना की गई है। जब व्यक्ति की बुद्धि अच्छी होती है तो वह सभी कार्य सही ढंग से करता है। इसलिए यह मंत्र बुद्धिवर्धक में लाभकारी है। 

गायत्री मंत्र का अर्थ: इसमें ईश्वर से प्रार्थना की गई है कि हे परमेश्वर हम सब मनुष्यों को सद्बुद्धि दे. ताकि हम बुराई के रास्ते को त्याग कर अच्छाई का मार्ग अपनाये। गायत्री मंत्र में परमेश्वर के गुणों का वर्णन किया गया है जो सारे ब्रह्मांड का बनाने वाला एवं चलाने वाला है, उस परमात्मा के कारण ही सभी जीवों में प्राण है. गायत्री मंत्र कहता है कि केवल वह परब्रह्म ही आराधना के योग्य है, अन्य और नहीं। इसलिए हे मनुष्यों तुम सभी उसी की शरण में जाओ अर्थात उसी का ध्यान करें जिससे वह तुम्हारे सभी कष्टों को छुड़ाकर समस्त सुख प्रदान करे। 

गायत्री मंत्र में ओ३म् का अर्थ 

गायत्री मंत्र में ओ३म्(ओंकार) शब्द का वर्णन है यह परमात्मा का सर्वश्रेष्ठ नाम है, यह तीन शब्दों (ओ + ३ + म्) से मिलकर बना है जिसका अर्थ है विराट, अग्नि, विश्व, हिरण्यगर्भ, वायु, तेजस, ईश्वर, आदित्य, प्रज्ञा आदि। इस मंत्र में बताया गया है कि वह ईश्वर सर्वशक्तिमान होने से सभी जीवों की रक्षा करता है; इस जगत व संसार में जो भी जीवन है उसका आधार वही ब्रह्मा है। वह भगवान प्राणों से भी अत्यंत प्रिय एवं अपने सामर्थ्य के कारण स्वयम्भू(self existing) हैं। उस ईश्वर को कोई दुख दर्द नहीं होता, उसके सानिध्य से सभी मनुष्य, एवं अन्य जीवों के दुःख नष्ट हो जाते है। 

गायत्री मंत्र बताता है कि ईश्वर इस समस्त ब्रह्मांड के बाहर भीतर व्यापत है, इसलिए उसने समस्त वस्तुओं, जीवों एवं पदार्थों को धारण किया हुआ है। यह मंत्र कहता है कि वह ईश्वर सभी पदार्थों को बनाने वाला एवं सभी जीवो सुख शांति आदि देने वाला है। ईश्वर के इन सभी गुणों के कारण सब लोग उसे पाने की इच्छा करते है, अतः मात्र वही शुद्ध स्वरूप एवं पवित्र परब्रह्म पूजनीय वा स्वीकार करने योग्य है। केवल उसी की कृपा से समस्त जन बुद्धि पाते है, उसी की प्रेरणा से बुराइयों से छुटकारा मिलता है, उसी की दया से श्रेष्ठ कार्य पूर्ण होते है। इसलिए तुम सभी उसी की वंदना करो।

गायत्री मंत्र का शब्द सहित अर्थ

  • गायत्री मंत्र बुद्धि या प्रज्ञा को बढ़ाने वाला मंत्र है, इस मंत्र में ईश्वर से सभी मनुष्यों लिए अच्छी बुद्धि प्राप्त करने की प्रार्थना की जाती है। 
  • वह ईश्वर सबसे विराट, तेजस, आदित्य एवं सब का रक्षक ब्रह्मा है। इसलिए उसका ईश्वर का नाम ओ३म्(ॐ) है।
  • वह ईश्वर सब जगत के जीवन का आधार है, प्राण से प्रिय तथा स्वयम्भू(self existing) है। इसलिए वह परमेश्वर भूः कहलाता है।
  • वह ईश्वर सब दुखों से रहित(free from pain) एवं जिसके संग से सभी जीव दुःखों से छूट जाते है। इसलिए वह परमेश्वर भुवः कहलाता है।
  • वह ईश्वर नानाविध जगत(All Universe) में व्यापक होकर सबको धारण करता है इसलिए वह परमेश्वर स्वः कहलाता है।
  • वह ईश्वर सब जगत का उत्पादक अर्थात बनाने वाला एवं सब ऐश्वर्य का देने वाला है। इसलिए वह परमेश्वर सवितु कहलाता है।
  • वह ईश्वर सब सुखों को देने वाला एवं उसकी प्राप्ति की इच्छा सब लोग करते है। इसलिए उस परमात्मा का जो (वरेण्यम) स्वीकार करने योग्य अति श्रेष्ठ (भर्गः) शुद्ध स्वरूप व पवित्र करने वाला चेतन ब्रह्मस्वरूप है(तत्) उसी परमात्मा के स्वरूप को हम लोग(धीमहि) धारण करे।
  • ताकि वह (यः) जगदीश्वर (नः) हमारी(धियः) बुद्धियों को (प्रचोदयात) बुरे कार्यों से छुड़ाकर अच्छे कार्यों में प्रेरित करें।

गायत्री मंत्र का सरल अर्थ

गायत्री मंत्र कहता है कि हे मनुष्यों वह परमात्मा जो सभी समर्थो में सबसे समर्थ है, सच्चिदानन्दानन्तस्वरूप है, नित्य शुद्ध-बुद्ध-मुक्त स्वभाव वाला है। इसके अलावा वह ईश्वर कृपा का सागर व ठीक प्रकार से न्याय करने वाला है। वह  जन्म मरण से मुक्त, क्लेश रहित एवं निराकार है; वह सर्वज्ञाता सभी जीवों, विद्या व पदार्थ आदि के घट-घट को जानता है तथा सभी का धर्त्ता पिता, व उत्पादक भी है।

वह ईश्वर अनादि विश्व का पालन पोषण करने हारा और सकल ऐश्वर्य युक्त व जगत का निर्माता है। वह तो शुद्ध स्वरूप होने से प्राप्ति की कामना करने योग्य है; उस परमेश्वर का जो पवित्र व चेतन स्वरूप है उसी को हम सभी मनुष्य धारण(ग्रहण) करें। ताकि वह भगवन अपनी प्रेरण से हमारी बुद्धि तथा आत्मा को बुरे कार्यों व इच्छाओं से हटाकर सत्य मार्ग एवं श्रेष्ठ कार्यों की ओर अग्रसर करें। वह ईश्वर सभी सुखों को देनेवाला है और कोई उसके समक्ष व अधिक नहीं है; इसलिए हम मनुष्य उसको छोड़कर किसी अन्य का ध्यान, पूजा नहीं करें।

गायत्री मंत्र के लाभ

सभी वैदिक मंत्रों में गायत्री मंत्र को श्रेष्ठ माना जाता है. जो लोग गायत्री मंत्र का जब करते है उन्हे बुद्धि से सम्बन्धित विशेष लाभ प्राप्त होते है।  इसका कारण यह है कि यह बुद्धि को बढ़ाने वाला मंत्र है। जो कोई व्यक्ति सच्चे मन से प्रतिदिन गायत्री मंत्र का जाप करता है उसका दिमाग व विवेक में दिन प्रतिदिन बढ़ोतरी होती रहती है। इस मंत्र में कहा गया है कि हे ईश्वर तू हमारी बुद्धि को सही मार्ग में प्रेरित कर ताकि हम सभी प्रकार की बुराई से सदैव बचे रहे। और सही रास्ते पर चलकर श्रेष्ठ जीवन व्यतीत करें। 

यह मंत्र भय का नाश करने में भी लाभकारी है, क्योंकि भय हमारे मस्तिष्क में उत्पन्न होता है। जब कोई व्यक्ति डर जाता है या किसी अन्य कारण से भयभीत होने लगता है, रात को नींद नहीं आती है तो ऐसी स्थिति में गायत्री मंत्र का मन में उच्चारण करने से डर समाप्त हो जाता है।

गायत्री मंत्र के नुकसान

वास्तव में गायत्री मंत्र का किसी भी प्रकार का कोई भी नुकसान नहीं है। कुछ लोगों को लगता है कि गायत्री मंत्र के नकारात्मक प्रभाव भी होते है, परंतु यह बिल्कुल झूठ विश्वास है। वास्तविकता तो यह है कि गायत्री मंत्र हमारी बुद्धि को बढ़ाता है. इसका कोई नुकसान नहीं है।

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