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कोरोना काल में शिक्षा : Online व Offline Class प्रभाव, निबंध

coronavirus ka shiksha par prabhav

आज इस लेख में हमने corona kal me shiksha nibandh पर चर्चा की है, इस पोस्ट के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया है कि किस प्रकार कोरोना का शिक्षा पर प्रभाव पड़ा है, और विद्यार्थियों की पढ़ाई का इस दौरान कैसे नुकसान हुआ है।

कोरोना वायरस महामारी ने शिक्षा को बुरी तरह से प्रभावित किया है। स्कूल, कॉलेज व अन्य विश्वविद्यालयों के बंद हो जाने से छात्रों की पढ़ाई का बहुत नुकसान हुआ है। कई सारे विद्यार्थी अपनी परीक्षा भी नहीं दे सके। अतः सरकार को उन्हें अगली कक्षा में बिना परीक्षा लिए ही प्रमोट करना पड़ा, ताकि छात्रों का एक वर्ष बेकार ना हो।

पिछले 2 वर्षो से सभी विद्यालय बंद थे, अध्यापक ऑनलाइन पढ़ा रहे थे, स्कूल वाले फीस मांग रहे हैं, छात्रों का पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था, विद्यार्थियों में भय का माहौल था, परीक्षाएं स्थगित हो चुकी थी, छात्रों को अगली कक्षा में प्रमोट किया जा रहा था, टीचर स्टूडेंट संवाद टूट सा गया था।

कोविड-19 वायरस ने हम सभी को घरों में कैद करके रख दिया है। यह एक छुआछूत की बीमारी हैं। अतः एक-दूसरे से संक्रमित होने की बहुत ज्यादा संभावना रहती है। इसलिए बहुत से देशों की सरकारों ने लॉकडाउन जैसे तरीके को अपनाया। भारत ने अपने लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2020 में विश्व का सबसे बड़ा लॉकडाउन लगाया गया।

इससे हमें बहुत से आर्थिक व अन्य प्रकार की हानि उठानी पड़ी है। लेकिन यह जरूरी कदम था। बच्चों, बुजुर्गों व कमजोर लोगों के जीवन रक्षा हेतु सरकार को यह कठिन निर्णय लेना पड़ा। अगर ऐसा नहीं किया जाता तो अब तक कितने करोड़ लोगों को संक्रमण हो गया होता, स्कूल व कॉलेज के छात्रों को मद्देनज़र रखते हुए सरकार ने बहुत से छात्रों को अगली कक्षा के लिए पास कर दिया।

कोविड काल में शिक्षा एवं छात्र

कोविड काल में शिक्षा का नुकसान तो हुआ है, जिससे छात्रों की कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं अधूरी रह गई। दसवी व बारहवीं की परीक्षाएं कई राज्यों में पूर्ण नहीं हो पाई। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा  बच्चों को अगली कक्षा के लिए तैयार करने में सबसे अधिक सहायक साबित हुई। ऑनलाइन शिक्षा के माध्यम से लगभग सभी विद्यार्थियों ने अपने जरूरी विषयों की ऑनलाइन क्लास प्राप्त कर अच्छे से विद्या ग्रहण की, हालांकि छात्रों को ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली का अभ्यास न होने से कुछ समस्याएं झेलनी पड़ी, परंतु कुछ समय बीत जाने के पश्चात उन्हे इस प्रणाली का अभ्यास हो गया है।

शिक्षा के क्षेत्र में ऑनलाइन तकनीकी का बहुत ही महत्वपूर्ण प्रयोग होता है, ऑनलाइन शिक्षा क्या है और इसका महत्व क्या है, यह कोरोना काल में हमें पता चल गया। जो भी हो ई-लर्निंग की सहायता से बच्चों ने शिक्षकों से ऑनलाइन क्लासेस के माध्यम अपनी मित्रता बनाकर रखी एवं परीक्षा में विद्यार्थियों को इसका फायदा भी मिला। 

भारत में पीएम मोदी द्वारा कोरोना वैक्सीनेशन अभियान के माध्यम से सभी युवाओं एवं बुजुर्गों को वैक्सीन लगा दिया गया है, इससे कोरोना संक्रमण का खतरा टल गया है। इसलिए सभी राज्य सरकारों ने पुनः विद्यालय खोल दिये है और सभी स्कूल व कॉलेज सुचारू रूप से शिक्षा प्रदान कर रहे है। एक लम्बे अन्तराल के पश्चात शिक्षा व्यवस्था पुनः पटरी पर लौट आयी है, बच्चे, बड़े, बूढ़े सभी व्यक्ति बहुत प्रसन्न है। हालांकि विश्व में कोरोना के बहुत सारे नए वेरिएंट मिलते जा रहे है, परंतु भारत को कोविड अब उतना भय नहीं है जितना पहले था, क्योंकि सरकार ने बहुत तेजी से जनता के लिए सफल वैक्सीनेशन कर दिया है।

 

कोरोना काल में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले विद्यार्थी 

रोजगार के अवसर की तलाश में अनेकों छात्र सरकारी नौकरी की तैयारी करते है, लेकिन कोरोना वायरस की वजह से सभी प्रकार की सरकारी भर्तियाँ स्थगित कर दी गई थी। कोरोना संक्रमण के भय से विद्यार्थियों के जीवन के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता था; ऐसे में आयोग द्वारा छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए, परीक्षाओं को देरी(delay) से करना उचित कदम था। किंतु इसके बहुत ही नकारात्मक परिणाम भी छात्रों पर दिखायी दिये है। छात्र कोविड काल में भी सरकारी नौकरी के परीक्षा देने को तैयार थे, ऐसा इसलिए था, क्योंकि रोजगार पाने के लिए छात्रों ने जिस उद्देश्य के लिए पढ़ाई की थी अगर वो पूरा न हो तो ऐसे पढाई का क्या फायदा। बहुत सारे छात्र ऐसे भी है जो कई वर्षों से तैयारी कर रहे, कई ऐसे है जिनका आखिरी प्रयास बचा था। इस स्थिति में छात्रों का सरकार के प्रति आक्रोशित होना बिल्कुल स्वाभाविक था। जब बात रोजगार और आजीविका पर आती है तो व्यक्ति किसी भी समस्या का सामना करने को तैयार हो जाता है। अतः छात्र सरकारी परीक्षाएं जल्द से जल्द कराने की मांग कर रहे थे। 2020 के 2 वर्ष पश्चात अब पुनः सरकारी भर्तियाँ आने लगी है एवं परीक्षाएं सुचारू रूप से होने भी लगी है, कोचिंग सेंटर खुल गये है, कम्पटीशन की तैयारी कर रहे छात्रों में खुशी का माहौल है।

छात्रों पर लॉकडाउन के प्रभाव 

लॉकडाउन के छात्रों पर बहुत भयंकर प्रभाव पड़ें है। लॉकडाउन ने बच्चों को मानसिक व  शारीरिक रूप से बहुत ज्यादा प्रभावित किया है।स्कूल व कॉलेज बंद होने कारण बहुत तनाव झेलना पड़ा। क्योंकि बच्चों को कई महीनों तक घर में कैद हो रहना पड़ा। घर के अंदर ही महीनों समय बिताना बहुत जटिल हो गया। क्योंकि बच्चे स्कूल व कॉलेज नही जा पा रहे थे। बाहर खेल-कूद, घूमना-फिरना आदि गतिविधियाँ नही कर पा ये। जिससे उनके स्वास्थ्य को प्रभावित किया। साथ ही एक ही स्थान पर रहने से वो थोडे चिड़चिड़े भी हो गये। बच्चे ही क्या बड़े भी मानसिक व शारीरिक रूप से प्रभावित हुए।

Coronavirus Se Kaise Bache (कोरोना वायरस से कैसे बचा जा सकता है)

कोरोना वायरस से बचने के लिए प्रतिदिन घर पर योगाभ्यास, व्यायाम, भस्त्रिका कपालभाति अनुलोम विलोम प्राणायाम करे, हरी सब्जियां, फल, दाल, गाय का दूध, दही, देसी घी, सलाद खाये, 8 घंटे की नींद ले, खुश रहें, डरे नहीं, गिलोय का काढ़ा पिएं, ठंडा जल ना पिये, मन को शांत रखें। घबराये नहीं, मास्क पहने, स्वच्छ रहे, घर को साफ रखें, दूसरे व्यक्ति के अधिक निकट ना जाये, गर्म जल ग्रहण करें, धुएं व प्रदूषण आदि से दूर रहे। धूम्रपान ना करे ना करने दे, शराब ना पिये।

विश्व स्वास्थ्य संगठन कोरोना वायरस पर रॉय

अगर छात्रों की संख्या पर ध्यान दे तो. पूरी दुनियाँ में एक बहुत बड़ी आबादी छात्रों की है। अतः छात्रों के बचाव के लिए सभी सरकारी व विश्व स्तरीय संस्थाएँ पूरा ध्यान दे रही है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना की वैक्सीन अगले वर्ष तक बनने को कहा है। कई देश कोरोना की वैक्सीन बनाने में लगे है। लेकिन पूर्णत सफल परीक्षण की कोई गारंटी नहीं दे पाया है। ऐसे में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हमें शोसल डिस्टेंसिंग का पालन करने, साफ-सफाई रखने, बिना वजह बाहर जाने से मना आदि नियमों का पालन करने को कहाँ है।

उपंसहार

कोरोना काल का यह भयंकर समय अभी पूर्ण नहीं हुआ है। हमारे देश में तो इसका संक्रमण होने के अभी बहुत ज्यादा संभावना है। इसकी वैक्सीन अभी पूर्णतः सफल नहीं हो पाई है। ऐसे में बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र से दूर नहीं रखा जा सकता है।

अभिभावन अपने बच्चों के कैरियर को लेकर चिंतित है। लेकिन साथ ही वे कोरोना के भय से बच्चों को स्कूल व कॉलेज आदि नही भेजना चाहते। ऐसे में सरकार भी इस पर विचार कर रही है कि इस समस्या का समाधान कैसे निकाला जाये। क्योंकि अगर हम शोसल डिस्टेंसिग अपनाकर भी स्कूल व कॉलेज खोल दे तो भी कोरोना संक्रमण की पूरी संभावना रहेंगी। इस स्थिति में फैसला लेने बहुत ही कठिन मालूम होता है।

क्योंकि जीवन की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। अतः इस महामारी काल में हम ऑनलाइन शिक्षा के फायदे उठाकर ही अगले वर्ष की सभी परीक्षाओ को ध्यान में रखकर तैयारी करे। छात्र इंटरनेट का सद्पयोग पढाई, दुरुपयोग न करे। क्योंकि इंटरनेट का ज्यादा प्रयोग हमारी एकाग्रता को भंग कर सकता है।

विभिन्न प्रकार की सामग्री इंटरनेट पर उपलब्ध है। अतः छात्र केवल अपने प्रयोग में आने वाली सामग्री का ही प्रयोग करे। साथ सभी मात-पिता की ज़िम्मेदारी है, कि वे अपने बच्चों को मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने में सहायक बने।

उनका हौसला बढ़ाये, ताकि वे आने वाली सभी प्रकार कि समस्याओं का जीवन में सामना कर सके। और शिक्षा के उद्देश्यों को साकार करे सकें। शिक्षा हमें यही सिखाती है, कि जीवन की चुनौतियों से कैसे निपटें। साथ ही कैसे अपना आत्मविश्वास बनाये रखे और आगे बढ़े। जीवन की चुनौतियों को स्वीकार कर उनका सही समाधान करना ही सभी छात्रों का लक्ष्य होना चाहिए।

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