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bhrashtachar ko rokne ke upay – भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय

bhrashtachar ko rokne ke upay

हिन्दी माध्यम के पाठकों के लिए हमने भ्रष्टाचार पर निबंध हिन्दी में लिखने का प्रयास किया हैं। आशा है इसके माध्यम से आपको भ्रष्टाचार का अर्थ क्या है, यह क्यों है और इसके कारण क्या है इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।  साथ ही यह भी जानेगे कि भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय क्या हैं।

भ्रष्टाचार एक ऐसा विषय हैं जो विद्यार्थीगण, अध्यापकों, बड़े बुजुर्गों, बच्चों, बुद्धिजीवियों, महिलाओं एवं समाज के अन्य लोगों के लिए महत्वपूर्ण चर्चा का मुद्दा हैं।

अक्सर विद्यालयों में, कॉलेज में विद्यार्थियों को bhrashtachar par nibandh लिखने के लिए पूछा जाता है। सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इस विषय से समबन्धित प्रश्न बहुत अधिक बार आते रहते हैं।

भ्रष्टाचार का अर्थ हैं (Bhrashtachar Ka Matlab Kya Hai)

भ्रष्टाचार का अर्थ हैं किसी व्यक्ति के आचरण का भ्रष्ट हो जाना, और उसके द्वारा ऐसे गलत कृत्य करना जो दूसरे व्यक्तियों व समाज के लिए हानिकारक सिद्ध होते हैं। अर्थात व्यक्ति जब पतित अथवा दुश्चरित्र विचारों को ग्रहण अपने जीवन में लाभ व स्वार्थ के लिए प्रयोग में लाता हैं। भ्रष्ट व्यक्ति कहलाता है।

आज समाज लगभग पूर्ण रूप से भ्रष्ट हो चुका हैं। प्रत्येक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति सें अपना स्वार्थ सिद्ध करने में लगा है। चाहे सरकारी कर्मचारी हो अथवा प्राइवेट कर्मचारी हो, दोनों ही जगह पर भ्रष्टाचार का बोलबाला हैं। बिजनेसमैन, दुकानदार, डॉक्टर, वकील, निजी संस्थाएँ, पुलिस, स्कूल , कॉलेज आदि लगभग हर जगह बेईमानी, फ्रॉड, रिश्वतखोरी, झूठ, धोखेबाजी, असत्य आदि बुराईयाँ विराजमान हैं।

लगभग सभी देशों की सरकारों में भ्रष्टाचार कहीं ना कहीं लिप्त हैं। नेतागण राजनीती, सत्ता व अधिक पैसे के लालच में भ्रष्टाचार जैसे कृत्य में लिप्त हैं। 

इसके कुछ मुख्य उदाहरण इस प्रकार हैं –

  1. कंसल्टेंसी सर्विसेज द्वारा ग्राहकों को रोजगार का झांसा देकर फ्रॉड करना।
  2. बैंकों के अधिकारियों द्वारा लोन पर कमीशन खाना।
  3. स्कूल व यूनिवर्सिटी द्वारा फर्जी मार्कशीट व फर्जी डिग्री जारी करना।
  4. बिना लाइसेंस के कंपनियां व कॉल सेंटर चलाना।
  5. खाद्य पदार्थों में मिलावट कर बेचना।
  6. पेट्रोल, डीजल व तेल में मिलावट करके बेचना।
  7. टैक्स न देना।
  8. वन के कर्मचारियों द्वारा जंगल की कीमती लकड़ियाँ बेचना।
  9. इंजीनियर अथवा ठेकेदार द्वारा भवन निर्माण में घटिया व सस्ता मटेरियल लगाना।
  10.  फर्जी बिल बनाना।
  11.  वकीलों द्वारा अपने क्लाइंट से जरूरत से ज्यादा फीस चार्ज करना।
  12.  बिजली चोरी करना व बिजली के मीटर में गड़बड़ी करना ताकि बिल कम आये।

Bhrashtachar Ke Kya Karan Hai (भ्रष्टाचार के क्या कारण है)

भ्रष्टाचार का मुख्य कारण पैसे का लालच हैं। व्यक्ति अधिक पैसा कमाने की मंशा में अनैतिक व पतित कार्य करने में लिप्त हो जाता हैं। उदाहरण के लिए – घूस ले कर कार्य करना, पैसा बचाने के लिए इनकम टैक्स नहीं देना, दस्तावेज व बही खातों में केवल अपना फायदा कमाने के लिए गड़बड़ी करना आदि।

इसके अलावा रिश्तेदारो को गैरकानूनी रूप से सहायता प्रदान करना, भाई भतीजावाद का फायदा उठाना, ऑफिस में जिम्मेदारी से कार्य न करना, स्कूल व कॉलेज में पैसे लेकर विद्यार्थी को पास करना।

राजनीतिक फायदे के लिए जनता को ठगना व मूर्ख बनाना। सरकारी कर्मचारियों व राजनीतिक पार्टियों द्वारा जनता के पैसो  का प्रयोग अपने खुद के लिए करना।

Bhrashtachar Ke Udaharan (भ्रष्टाचार के उदाहरण)

  • दफ्तर के कार्य छोड़कर अन्य निजी कार्य करना।
  • अध्यापकों द्वारा विद्यार्थियों को ना पढ़ाना, अपितु इधर उधर की बातों में समय नष्ट करना।
  • दुकानदारों द्वारा ग्राहक को सामान बेचते समय वस्तुओं के मूल्य(दाम) व मात्रा में गड़बड़ी करना।
  • पैसे लेकर अथवा देकर दस्तावेजों में जालसाजी व अमान्य गड़बड़ करना।
  •  कोर्ट कचहरी, बैंक, नगर निगम, पुलिस व अन्य प्रशासनिक ईकाओं द्वारा रिश्वत(पैसा) लेकर कार्य सिद्ध करना।
  • डॉक्टरों द्वारा मरीज को मूर्ख बनाकर ऑपरेशन करना, गलत सलाह देना व मूल्य से अधिक दाम पर दवा बेचना।
  • निजी संस्थान अथवा कंपनियों द्वारा ग्राहक को झूठी व गलत जानकारी देकर फ्रॉड करना।
  • सरकार में मंत्रियों, सांसदों, विधायकों द्वारा सरकारी पैसों का दुरुपयोग करना, स्वयं के लिए निजी संपत्ति(प्रॉपर्टी) खरीदना।
  • प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा नकली शराब वितरण में, जानवरों की तस्करी में, भू माफियाओं द्वारा भूमि अधिग्रहण आदि अन्य गैरकानूनी कार्यो में सहायता प्रदान करना।

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Bhrashtachar Ko Rokne Ke Upay (भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय )

भ्रष्टाचार को रोकने के लिए गवर्नमेंट द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी कड़े कानून व नियम बनाकर उस पर स्वयं व जनता को अमल करना होगा। ऐसा नहीं हैं कि मात्र सरकार व सरकारी जॉब करने वाले ही भ्रष्ट हैं। वास्तव में जनता व निजी संस्थाओं में प्राइवेट जॉब करने वाले, बिजनेसमैन, शॉपकीपर, दूध में मिलावट करने वाले आदि सभी जगह बड़ी मात्रा में भ्रष्ट लोगों द्वारा भ्रष्टाचार किया जाता हैं। भ्रष्टाचार को रोकने के उपाय इस प्रकार हो सकते हैं –

  • संसद व राज्य विधायिका द्वारा त्वरित गति से कार्य करने वाला कानून बनाये जाये।
  • न्यायालय द्वारा सरकार व प्रशासन को आदेश करे कि भ्रष्ट लोगों व संस्थानों पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
  • पुलिस प्रशासन व अन्य anti corruption team को सुधार, पर्याप्त संख्याबल एवं आधुनिक टेक्नोलॉजी युक्त संशाधनो की जरूरत।
  • इंटरनेट के माध्यम से हो रहे भ्रष्टाचार को रोकने की जरूरत।
  • उन सभी लोगों पर सख्त कार्रवाई जो देश-विदेश से भ्रष्टाचार में सहायता प्रदान करते हैं।
  • सरकार द्वारा सभी सरकारी व निजी संस्थानो, दुकानदार, बिजनेसमैन, डॉक्टर आदि को अपने यहाँ पर सीसीटीवी कैमरा लगाने का आदेश जारी करे, जो सुचारु रुप से 24*7 कार्य करे। 
  • सभी कर्मचारियों का समय समय पर कार्य अवलोकन हो, ताकि पता चल पाए कौन कैसा कार्य कर रहा है।
  • लोगो को सत्य के मार्ग पर चलने की शिक्षा के लिए प्रेरित किया जाए।

भ्रष्टाचार क्यों होता है,क्या सरकार भ्रष्ट हैं और भ्रष्टाचार निवारण में समाज की भूमिका

मनुष्य की जरूरत से अधिक बढ़ती भौतिक इच्छाएं, अधिकतम पैसा व प्रॉपर्टी पाने का विचार भ्रष्टाचार को जन्म देता हैं। भ्रष्टाचार स्वयं लोगों के स्वभाव में विराजमान हैं। जब कभी भी लोभ मनुष्य पर हावी होता है, उसी समय मनुष्य अमान्य या गलत कार्य के माध्यम से लाभ अथवा कुछ पा लेना चाहता हैं। 

इसके अलावा कम आय व बेरोजगारी भी भ्रष्टाचार के लिए कहीं ना कहीं उत्तरदायी हैं। व्यक्ति पैसों व जरूरी सुविधाओं के अभाव में गलत ढंग से आर्थिक लाभ में लिप्त हो जाता है।

क्या सरकार भ्रष्ट हैं।

हमारा समाज ही सरकार का निर्माण करता हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार में सभी लोग भ्रष्ट है। हर सरकार में कुछ लोग होते है जो ईमानदार व अच्छे होते हैं। लगभग प्रत्येक व्यक्ति सत्ता व शक्ति को प्राप्त करना चाहता हैं। इसे पाने के लिए झूठ, पैसा, गलत कार्य, बेईमानी, अपराध आदि कृत्यों का सहारा भी लेता हैं। वहीं व्यक्ति जब जनता द्वारा चुनकर सरकार का अंग बनता है तो रूतबा, पैसा, शोहरत, राजनीतिक पॉवर, सुख सुविधाएँ देखकर लालच में आ जाता है और भ्रष्ट विचार व कार्यों में लिप्त होना शुरू कर देते हैं। 

सरकार बहुत सारे जन प्रतिनिधियों से मिलकर बनती हैं। इसलिए इतने लोगों में कोई न कोई भ्रष्ट व्यक्ति निकल ही आता हैं। इसके अलावा संगति का असर भी हमें प्रभावित करता हैं। अच्छे लोग भी बुरे लोगों के सम्पर्क में आकर भ्रष्टाचार करने लगते हैं। क्योंकि मनुष्य का लालच उस पर हमेशा हावी रहता है।

सरकार में ऊपरी स्तर से लेकर निचले स्तर तक भ्रष्टाचार होता हैं। ऐसे में हमें ईमानदार, राष्ट्रभक्त, अनुशासित व निर्भीक लोगो व प्रशासकों की जरूरत है, जो सरकार के उच्चतम पद( प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री) पर कार्य कर सके और भ्रष्ट लोगों पर लगाम लगा सके।

भ्रष्टाचार निवारण में समाज की भूमिका

समाज ही सभी अच्छाईयों व बुराईओं का स्त्रोत व उत्तरदायी हैं। समाज द्वारा चुने लोग ही सरकार में भेजे जाते हैं। हमारे समाज के लोग ही सरकारी नौकरियों व पदों पर रखे जाते हैं। इसका अर्थ यह है कि समाज के अन्दर ही भ्रष्टाचार का बीज विद्यमान हैं। हमें अपने समाज में सुधार करने की आवश्यकता हैं। इसके लिए आवश्यक हैं कि हमे ऐसे लोगो को प्रमुख जिम्मेदारी देनी चाहिए जो विद्वान, योग्य हो और समाज हित व देश हित की मंशा रखते हैं। 

हमें सबसे पहले शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को शुरू से ही अच्छे कार्य करने की शिक्षा देनी चाहिए। उन्हे गलत कार्यों व लालच से दूर रहने की सलाह देनी चाहिए। यह जिम्मेदारी प्रत्येक माता पिता, बुजुर्ग, शिक्षक व अन्य सभी प्रमुख व्यक्तियों की है कि, वे भ्रष्टाचार मुक्त समाज व राष्ट्र का निर्माण करने में सहायक बने और दूसरों को भ्रष्टाचार करने से रोकें व उन्हें शिक्षित करें।

तभी जाकर एक अच्छी सरकार, न्यायपालिका, कार्यपालिका का निर्माण संभव हो सकता है, जो भ्रष्टाचार से मुक्त हो। इसका परिणाम यह होगा कि एक अच्छी सरकार ही समाज की बुराइयों व करप्शन पर कानून बनाकर अंकुश लगा सकती हैं। और देश हित में लोगों का भला व सभी जरूरतें अच्छे व सुचारू ढंग से प्रदान कर सकती हैं।

कृप्या हमें कमेंट कर के जरुर बताये कि आपको यह Bhrashtachar Par Nibandh अथवा विचार कैसा लगा।

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