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Bharat Desh Par Nibandh – Best 15 Visheshta, भूतकाल, वर्तमान स्थितियां

Bharat Desh Par Nibandh Hindi mein

इस पोस्ट में Bharat Desh Par Nibandh लेख लिखा है। इस निबंध में Bharat Desh Ki Visheshta, भूतपूर्व में भारत देश को हुए नुकसान एवं वर्तमान स्थिति के विषय में बताया है।

 

भारत देश वह है जिसके दक्षिण में हिमालय पर्वत और उत्तर में सागर स्थित है।  प्राचीन समय में आर्यों का निवास स्थान होने से इसका नाम आर्यावर्त था।  ब्रिटिश कंपनी ईस्ट इण्डिया के कारण इसका नाम इंडिया(India) हो गया। विश्व मे दूसरे नम्बर की जनसंख्या भारत में निवास करती है। यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। विश्व क्षेत्रफल में इसका स्थान सातवें(7) बड़े देश के स्थान पर आता है।

इस देश का इतिहास लाखो हजारों वर्ष पुराना है। भारतीय शास्त्रों के अनुसार जब सृष्टि की रचना हुई तब से ही भारत का अस्तित्व है।  भारत में अनेक प्रकार के मसालों के प्रयोग के कारण इस देश की लोकप्रियता विश्व विख्यात है। विभिन्न प्रकार की भाषा, वेशभूषा , त्योहार होने से विदेशी लोगों को यह देश अत्यंत प्रिय है। यहा के दीपावली और होली त्योहार को विदेशी लोग बहुत पसंद करते है।

वर्तमान में भारत अपनी आई टी टेक्नोलॉजी के लिए विश्व विख्यात है। स्पेस में इसरो संस्थान ने मंगल ग्रह एवं चन्द्रमा पर पहुँचाकर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। भारत ने विश्व को योग के लाभों से परिचित कराया है। इसलिए विश्व में 21 जून को योग दिवस मनाया जाता है। 

 

Bharat Desh Ki Visheshta

भारत देश की विशेषता इस प्रकार है-

1- वैज्ञानिक शिक्षा नीति को प्रोत्साहन

भारतवर्ष में प्राचीन काल से ही शिक्षा को प्रथम स्थान दिया गया है। यहा की शिक्षा का लक्ष्य मनुष्य को सत्य के मार्ग पर प्रशस्त करना है। ऐसा करने से सभी बुराइयों और कलेश दूर होकर जीवन को सुखदाई बनाते है। सामाजिक शिक्षा के साथ शारीरिक शिक्षा पर भी विशेष जोर दिया गया है। 

महर्षि पतंजलि के योग दर्शन शास्त्र में- योगासन, प्राणायाम, मेडिटेशन करने से शरीर व मन को स्वस्थ रखने के उपाय बताये गये है। स्वस्थ शरीर होने से ही विद्या अध्ययन एवं अन्य कार्यो में मन लगता है।  आयुर्वेद, महर्षि सुश्रुत द्वारा शल्य चिकित्सा का तरीका , शून्य व दशमलव की खोज भारत की वैज्ञानिक शिक्षा के कारण ही संभव हुई।

 

2- पृथ्वी गोल है यह भारत ने विश्व को बताया

विश्व में सबसे पहले भारतीयों ऋषियों(ज्ञानी) ने खोज लिया कि यह पृथ्वी गोल आकृति की है।  इसलिए उन्होंने उसे भूगोल नाम दिया। यहां ‘भू’  का अर्थ पृथ्वी एवं ‘गोल’ का अर्थ गोलाकार से है। प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों ने यह भी पता लगा लिया था कि पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है, और अपनी धुरी पर भी घूमती है। जिसे, क्रमशः ऋतुओं का बदलना एवं दिन रात की घटनाएं होती है। 

 

3- योग की खोज कर दुनिया तक पहुँचाया

महर्षि पतंजलि ने योग दर्शन के माध्यम से लोगो को योग करने की आवश्यकताएं और इसके लाभ बताये। योग करने से शरीर एवं मन स्वस्थ रहता है। योग का लक्ष्य मात्र शरीर को निरोगी रखना नहीं है, परंतु इसके आध्यात्मिक फायदे  भी है। योग द्वारा ध्यान(meditation) करने में सहायता मिलती है। जिससे व्यक्ति समाधि को प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त कर सकता है। लगातार योग का अभ्यास करने से  शरीर बलवान, सुन्दर एवं निरोगी हो जाता है। ब्रह्मचर्य की रक्षा में योग अति आवश्यक है। आज पूरा विश्व योग करके शारीरिक और मानसिक स्तर पर लाभ प्राप्त कर रहा है।

 

4- विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र

वर्तमान में भारत विश्व का सबसे विशाल लोकतांत्रिक देश है। यहां पर जनता द्वारा सरकार को चुना जाता है। देश के लोगो को स्वतंत्रता एवं सुरक्षा आदि कई मौलिक अधिकार संविधान द्वारा लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण ही संभव हुआ है। भारत देश में संसद प्रणाली व्यवस्था है। लोकसभा, राज्यसभा एवं राष्ट्रपति इसके प्रमुख अंग है। राज्य स्तर पर विधानसभा एवं राज्यपाल की व्यवस्था की गई है। देश को भ्रष्टाचार से रोकने का उपाय कर, न्यायपालिका को सरकार से स्वतंत्र रखा गया है।

 

5- विश्व में सबसे बड़ी शाकाहारी भोजन व्यवस्था

प्राचीन भारतीय भोजन व्यवस्था का मूल शाकाहारी खाद्य पदार्थों पर केंद्रित रहता था। इसका कारण यह है कि- मनुष्य जैसा भोजन खाता है वैसे ही उसके विचार हो जाते है। प्रत्येक खाद्य पदार्थ में उसके गुण विद्यमान होने से वे मनुष्य के शरीर और मस्तिष्क पर प्रभाव डालते है।  शाकाहारी भोजन ग्रहण करने से शरीर में सत्व गुण की प्रधानता हो जाती है। जिससे मनुष्य का चित्त निरोगी और इंद्रियां शांत रहती है। 

प्रकृति ने मनुष्य के लिए शाकाहार के रूप में सभी प्रकार के आवश्यक भोजन जैसे- फल, हरी सब्जियां, दूध, अनाज की व्यवस्था की है। ये सभी खाद्य पदार्थ वास्तव में औषधि के रूप में कार्य करते है। जिससे व्यक्ति के शरीर को आवश्यक पौष्टिक तत्व, खनिज, विटामिन आदि अवयव पूर्ण रूप से प्राप्त हो जाते है।

परंतु, प्राचीन भारत की तुलना में वर्तमान भारत में मांसाहार का चलन काफी बढ़ गया है। मांसाहार करने से दूसरे जीवों के रोग मनुष्य के अन्दर आने की संभावना रहती है।

 

6- आयुर्वेद शास्त्र की खोज

भारत देश में चिकित्सा ग्रन्थ आयुर्वेद का जन्म हुआ। यह ऋग्वेद का उपवेद ग्रन्थ है। धन्वंतरि, सुश्रुत और चरक आदि इसके प्रसिद्ध व्याख्याकार है। इस शास्त्र में खान पान, चिकित्सा, दिनचर्या, औषधियां आदि के विषय में विस्तार से उल्लेख किया गया है। आयुर्वेद मनुष्य को निरोगी रहने के लिए अपने सूत्र बताता है। साथ ही औषधियों से रोग के उपचार की विधि सिखाता है। पुराने समय में भारत के प्रत्येक परिवार में लोगों को आयुर्वेद के घरेलू नुकसो से उपचार करने की विद्या पता थी। वे लोग हल्दी, सौंफ, जीरा, लौंग, अदरक, नीम, आंवला आदि औषधियों से रोगों का घर पर स्वतः ही उपचार कर लेते थे। परंतु, वर्तमान समय में अंग्रेजी चिकित्सा पद्धति आ जाने से आयुर्वेद चिकित्सा को नजरअंदाज कर दिया गया है। जिसके कारण यह विद्या लुप्त होने लगी है। 

 

7- गणित का जन्मदाता

अनेक प्राचीन भारतीय ग्रन्थो में बीजगणित, रेखागणित, त्रिकोणमिति, ज्यामिति के प्रमाण मिलते है। इसके अलावा नवग्रह, 12 आदित्य, 11 रुद्र आदि का शास्त्रों में वर्णन किया गया है। भारत में बने अति प्राचीन भवन, मंदिर, मूर्तियाँ, आकृतियां आदि में गणित के नियमों का पूर्णतः पालन मिलता है। यज्ञ करने के लिए प्रयोग किये गये हवन कुंड की बनावट बीजगणित व रेखा गणित के सूत्रों को ध्यान में रखकर बनाई जाती थी।  जिससे सिद्ध होता है कि प्राचीन भारतीय परंपरा के लोग गणित विषय के जानकार थे।

 

8- विश्व की उभरती सुपरपॉवर

वर्तमान में भारत आर्थिक, सामाजिक एवं सुरक्षा के स्तर पर बहुत अच्छी स्थिति में है। देश में विश्व स्तर की सुविधाएं, रोजगार उपलब्ध है। भारत के राजनीतिक संबंध अनेक दूसरे देशों के साथ मित्र जैसे है। संयुक्त राष्ट्र संघ में भी भारत की बात को अहमियत दी जाती है। भारत की सेना विशाल और आधुनिक हथियारों से लेस है। भारत के पास परमाणु टेक्नोलॉजी है। 

 

9- ज्योतिष विद्या का उदय

ज्योतिष शास्त्र एक प्रकार का गणित है। भारत के लोग आदिकाल से ज्योतिष शास्त्र का ज्ञान रखते थे। इसी कारण लोगों को अंतरिक्ष में उपस्थित ग्रह एवं नक्षत्र की जानकारी थी। इसके अलावा सूर्य, चन्द्रमा, मंगल, बुध, बृहस्पति, शनि, आदि ग्रहों की दशा एवं स्थिति का पूर्ण ज्ञान प्राप्त था। 

भूतकाल में जब सैटेलाइट और टेलीस्कोप का अविष्कार भी नहीं हुआ था। तब भारत के ज्योतिष गण अपनी विद्या का प्रयोग कर भविष्य में होने वाले चंद्रग्रहण, सूर्यग्रहण, पूर्णिमा, अमावस्या आदि घटनाओं को पहले बता देते थे। वर्तमान में भी यह ज्योतिष गणना सटीक रूप से ठीक सिद्ध होती है।

 

10- विश्व की प्रथम यूनिवर्सिटी

भारत की अति प्राचीन जड़ो मे जाये तो पता लगता है कि, भारतीयों को शिक्षा का ज्ञान सबसे पहले प्राप्त हुआ। वैदिक काल से ही भारत में गुरुकुल शिक्षा सभी बालक बालिकाओं के लिए अनिवार्य थी। तक्षशिला को विश्व की प्रथम यूनिवर्सिटी कहा जाता है। इसके अलावा विक्रमशिला, नालंदा आदि प्राचीन विश्वविद्यालय प्राचीन भारतीय शिक्षा के उदाहरण है। भारत में अनेक जगह पांडुलिपि, स्तंभ लेख, शिलालेख आदि एक संपूर्ण शिक्षा नीति को दर्शाते है। 

 

11- प्रकृति की उपासना

भारतवर्ष के लोग पहले से ही प्रकृति को माता मानकर उसकी उपासना की है। इसका कारण है कि मनुष्य को जीवित रहने के लिए सभी वस्तुएं जैसे- फल, सब्जी, औषधि, ईंधन, आभूषण, हवा, जल, अग्नि, वस्त्र, अन्न, नदियां आदि सभी पदार्थ प्रकृति के संसाधनों द्वारा ही मिलते है। अर्थात प्रकृति इन सभी वस्तुओं की जननी होने से पूजनीय है। ऐसा करने से लोग प्राकृतिक वस्तुओं के प्रति उपकार का भाव रख इसके संरक्षण की जिम्मेदारी लेते है। ताकि भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों की कमी न हो जाये।

 

12- इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी में अग्रणी

भारत की इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी विश्व विख्यात है। यहा पर सॉफ्टवेयर इंजीनियर, डेवलेपर्स आदि कंप्यूटर तकनीक की प्रधानता है। सस्ती सेवाओ के कारण भारत अपनी आई टी सर्विस विदेशी कंपनियों और लोगों को प्रदान करता है। जिससे भारत देश को आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलती है।

 

13- डिजिटल भारत का निर्माण

भारत में कंप्यूटर, स्मार्ट फोन और इंटरनेट का प्रयोग बहुत बड़े स्तर पर किया जाता है। आज भारत में लगभग प्रत्येक घर में मोबाइल एवं इंटरनेट सुविधा है। जिस कारण व्यक्ति ऑनलाइन सुविधाएं जैसे- बैंकिंग, स्वास्थ्य, गैस बुकिंग, टिकट रिजर्वेशन, बिजनेस, रोजगार आदि घर बैठे ही प्राप्त कर लेता है। रिलायंस जियो कंपनी के सस्ता इंटरनेट प्रदान करने से भारत देश में इंटरनेट क्रांति आ गई है। 

 

इंटरनेट के कारण यूट्यूब के माध्यम से लोगो को रोजगार मिला है। सरकारी और प्राइवेट सेवाएं ऑनलाइन होने से सरल हो गई। जिससे समय, पैसा और शारीरिक श्रम की बचत हुई है। वर्तमान में प्रधानमंत्री मोदी जी ने डिजिटल इंडिया का अभियान चला रखा है। जिसका लक्ष्य भारत को पूर्ण रूप से डिजिटल बनाना है।

 

14- संसार को शांति का पाठ सिखाया

भारत समस्त विश्व को अपना कुटुम्ब मानता है। भारतीय शास्त्रों में विश्व के सभी जीवो को शांति प्रदान करने की प्रार्थना की गई है। यह मंत्र इस प्रकार है- सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुख भागभवेत।

इस मंत्र का अर्थ है कि हे ईश्वर सब सुखी रहे, सब निरोगी हो, सबका जीवन मंगलमय हो और कोई दुख का भागी ना हो।

 

इससे सिद्ध होता है कि, भारत के लोग विश्व में शांति स्थापित करना चाहते थे। ताकि मनुष्य सहित अन्य सभी जीवों का भला हो। सब सुख शांति भरा जीवन व्यतीत करें। वर्तमान में भी भारत इस सिद्धांत का अनुसरण करता है।

 

15- स्त्री पुरुष में समानता का संदेश

विश्व में सर्वप्रथम भारत ने स्त्रियों को पुरुष के बराबर अधिकार प्रदान किये। प्राचीन काल से ही नारी जाति को शिक्षा, चिकित्सा, विद्या, वेशभूषा, स्वतंत्रता, राजकार्य, युद्धकला, शास्त्र व  शस्त्र ज्ञान आदि विषयों में पुरुष के समान ही सभी अधिकार प्राप्त थे। स्त्री अपनी इच्छा से अपना वर चुन सकती थी, जिसे स्वयंवर के नाम से जाना जाता है। 

 

वर्तमान और भविष्य की पीढ़ी शिक्षित होकर सभ्य बन जाये इस विचार को ध्यान में रखते हुए भारतीय वैदिक शिक्षा में स्त्री-पुरुष दोनों का शिक्षा ग्रहण करना आवश्यक था।  गुरुकुल बालक व बालिकाओं को शिक्षित कर उनके चरित्र निर्माण का कार्य करते थे। ताकि एक श्रेष्ठ समाज का निर्माण किया जा सके।  नारी सशक्तिकरण का कॉन्सेप्ट प्राचीन भारतीय समाज में दृढ़ता से पालन किया जाता था। जो आज भी उसी प्रकार मौजूद है।

 

भूतकाल में विदेशी ताकतों द्वारा भारत को होने वाले नुकसान

पुराने समय से ही भारत एक अत्यधिक समृद्ध देश था। इसलिए भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था। जब यह बात विदेशियो को पता लगी तो उन्होंने भारतवर्ष पर अनेक आक्रमण किये।  712 ई में भारत पर मोहम्मद बिन कासिम ने आक्रमण किया। उसके बाद गजनी, गौरी आदि ने एक के बाद एक आक्रमण कर भारत की सभ्यता का नष्ट किया तथा स्वर्ण हीरे जवाहरात आदि धन संपदा को लूट कर अपने देश ले गये। 

बाद में तुर्क शासक के वंशज मुगलो ने भारत के बहुत बड़े क्षेत्र पर अपना कब्जा कर लिया और एक लम्बे समय तक गुलाम बनाकर रखा।

 

इसके बाद ब्रिटिश शासक ने मुगल शासकों को धीरे-धीरे अपने अधीन कर लिया और लगभग पूरे भारत में अंग्रेजी सरकार का शासन स्थापित किया। इससे मुगल शासन का अंत हो गया। और भारत में इंग्लैंड राज्य की सरकार का आधिपत्य स्थापित हुआ। सन् 1947 में भारत देश का अंग्रेजी सरकार ने  दो भागो क्रमशः हिंदुस्तान एवं पाकिस्तान में विभाजन कर दिया। इस घटना से भारत को बहुत अधिक क्षति हुई जिसमें लाखों लोगों की जान गई। 1947 में ही ब्रिटिश सरकार ने सत्ता का हस्तनान्तरण भारतीयो को दे दिया।

 

भारत की गुलामी का कारण

भारत की गुलामी का कारण भारतीयों में आपसी फूट होना, एवं एकता का अभाव था। अपने देश के लोगों को धोखा देकर, सत्ता व पैसे के लालच में भारत देश के ही कुछ शासक विदेशी ताकतों का साथ देते थे। जिस कारण भारतीय शासकों को हार का मुँह देखना पड़ता था। इसके अलावा जाति व्यवस्था भारत की गुलामी का सबसे बड़ा कारण है। केवल एक वर्ग को ही युद्ध करने का अधिकार होने के कारण अन्य सभी वर्ग युद्ध में हिस्सा नहीं लेते थे। इसलिए सेना की संख्या कम होने के कारण भारतीय शासक हार जाते थे। 

 

भारतीय शास्त्रों में वर्ण व्यवस्था का विधान है। जो कर्म के आधार पर निर्धारित है, न कि जन्म के आधार पर, परंतु, उच्च पदों पर बैठे लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए इसे जन्म आधारित कर लोगों को महत्वपूर्ण अधिकारों से वंचित कर दिया। परिणाम यह हुआ कि, भारत देश की एकता टूट गई और विदेशियों ने भारत को लूट कर इसकी श्रेष्ठता को नष्ट कर दिया। 

 

भारत की वर्तमान स्थिति

वर्तमान में भारत एक विश्व शक्ति के रूप में सामने आया है। मेडिकल, इंजीनियरिंग और आई टी तकनीक में भारत का नास शीर्ष देशों में गिना जाता है। यहा की लोकतांत्रिक शासन प्रणाली ने विश्व को एक बड़ा संदेश दिया। भारत देश ने अपने आयात को कम कर, निर्यात को बढ़ाया है। इसका कारण सरकार द्वारा स्वदेशी वस्तुओं के निर्माण को प्राथमिकता देना है। ऐसा करने से रोजगार में वृद्धि हुई है। साथ ही विदेशी कंपनियों पर निर्भरता से राहत मिली है। जिससे भारत की बचत कोष में मुनाफा हुआ है। ऐसा करने से जीडीपी ग्रोथ में सकारात्मक वृद्धि हो गई है। 

 

अब भारत का लक्ष्य पूर्णतः आत्मनिर्भर बनने का है। ताकि किसी अन्य देश की तरफ सहायता के लिए हाथ न फैलाना पड़े। इसलिए  भारत सरकार भारतीय पूंजीपतियों को अधिक सहायता और विदेशी कंपनियों को एफडीआई के माध्यम से मेड इन भारत मैन्युफैक्चरिंग इन्वेस्ट करने की रणनीति पर कार्य करती है। इस नीति से भारत का निर्यात बढ़ गया है। इसके अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक परिणाम भी दिखने लगे है।

 

उपसंहार

वर्तमान भारत की स्थिति को देखते हुए लगता है कि, भारत ने पहले जो नुकसान झेले थे, अब उनसे उबर आया है। आर्थिक रूप से मजबूत होने के कारण भारत अब विकासशील समृद्ध देशों में गिना जाता है। आधुनिक  सुरक्षा की दृष्टि से भी भारत काफी सुरक्षित है। शिक्षा एवं कृषि के क्षेत्र में भारत ने सराहनीय प्रगति की है। हमें अब इतिहास की पुरानी गलतियों से सबक लेकर इन्हे दोहराना नहीं चाहिए। भारत के प्रत्येक व्यक्ति का लक्ष्य देश की अखंडता, समृद्धि, सुरक्षा आदि में प्रगति में भागीदारी का होना चाहिए। 

कमेंट करके बताये Bharat Desh Par Nibandh कैसा लगा।

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